पांच महीने की तीरा कामत अब आम बच्चों की तरह बचपन बिता सकेगी। मुंबई की तीरा को स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (एसएमए) टाइप 1 बीमारी है। यह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी जीन थेरेपी से ही ठीक हो सकती है। मुश्किल यह है कि थेरेपी के लिए जो इंजेक्शन लगना है, उसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है। यह सिर्फ अमेरिका में ही मिलता है। मुश्किल यह भी है कि इंजेक्शन को अमेरिका से मंगवाने में करीब 6.5 करोड़ रुपए इम्पोर्ट ड्यूटी (23%) और जीएसटी (12%) लग रहा था। तब इसकी कीमत 22 करोड़ रुपए हो जाती। हालांकि 1 फरवरी को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी ने इन मुश्किलों को आसान कर दिया। फडणवीस ने पीएम से टैक्स से छूट देने का आग्रह किया था। पीएम मोदी ने दवा पर लगने वाला टैक्स माफ कर दिया है।इस रोग में दूध पीना, सांस लेना कठिन होता है। मसल्स पर नियंत्रण नहीं होता।
दुर्लभ जेनेटिक रोग, जीन थेरेपी का इंजेक्शन देगा जिंदगी
समाचार पत्र में यह समाचार है कि एक दुर्लभ जेनेटिक रोग के लिए अमेरिका से एक इंजेक्शन आने वाला है जो लगभग 22 करोड रुपए का पड़ता है परंतु उसमें सरकार इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी माफ कर रही है सत्य हो करीब ₹160000000 में पड़ेगा भारत में अनेकों बच्चे अनेकों तरह की दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं और आए दिन सोशल मीडिया पर इनके मां बाप मदद की गुहार लगाते नजर आते हैं यह हर दिन का की बात हो गई है उपरोक्त 16 करोड़ की दवाई में के बारे में लिखते हुए डॉक्टरों का अनुमान है कि इससे दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ठीक हो सकती है परंतु ठीक हो सकती है अगर इसी बीमारी को भारत के कुछ जीनियस सीनियर होम्योपैथ डॉक्टरों के सामने रखा जाता है तो वह सभी ठीक हो सकती है यह आश्वासन दे सकते हैं और उनके आश्वासन का वास्तव में हर्ष होगा अर्थ होगा की ठीक हो ही जाएगा और इस तरह की सभी बीमारियों में होम्योपैथी अधिक विश्वसनीयता से कार्य कर सकती है परंतु खेद है की इस तरह से कोई अप्रोच भी नहीं होता और कोई विश्वास भी नहीं करता इसके लिए कौन दोषी है और ऐसा क्यों हो रहा है यह अपने आप में चिंतन का विषय है बहराल अगर होम्योपैथी से ठीक होती है तो 16 करोड नहीं 1600000 नहीं लगभग मुफ्त में ऐसे रोगी ठीक हो सकते हैं और वह भी बिना किसी साइड इफेक्ट या परेशानी के कृपया होम्योपैथी को ट्राई करें और उस पर भरोसा करें केवल आपका कार्य यह होगा कि आप जीनियस होम्योपैथ को खोज ले
अगर इस तरह की दुर्लभ बीमारियों में आप होम्योपैथी से चिकित्सा कर ठीक होते हैं तो कृपया ढोल नगाड़े बजाकर धूमधाम से उसका ऐलान करें और होम्योपैथी के उपकार का आभार माने क्योंकि ऐसा अनेको बार देखा गया है की दुर्लभ बीमारियों में लाभ प्राप्त करने के बावजूद 16 करोड़ खर्च करने के बावजूद भी जिन बीमारियों को एलोपैथी ठीक नहीं कर सकती ऐसी बीमारियां होम्योपैथ ने ठीक की है परंतु किसी ने भी जिक्र तक करना जरूरी नहीं समझा जबकि हर एक होम्योपैथ के पास उसकी जिंदगी में इस तरह के असाध्य सौ दो सौ केस अवश्य जिन्हें उन्होंने पूरी तरह से रोग मुक्त कर दिया है परन्तु ठीक होकर भी किसी रोगी ने इसका किसी से जिक्र करना भी जरूरी नही समझा यह दुखद है
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