शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

कंचन को कचरा बनाने का प्रयास

 कंचन को कचरा बनाने का प्रयास

आदरणीय आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपने जो स्क्रैप पॉलिसी लांच की है  उचित नहीं है उसे वापस लेना चाहिए कचरे से कंचन बनाने का अभियान नहीं है बल्कि कंचन से कचरा बनाने का अभियान है प्रधानमंत्री जी एक चीज होती है राष्ट्रीय संपत्ति राष्ट्र में जो कुछ भी है वह राष्ट्र की संपत्ति है और वह जब तक उपयोग में आ सकती है तब तक उसका उपयोग करना यह हमारा कर्तव्य भी है,आज की आवश्यकता भी है और राष्ट्र की सेवा भी है विदेशी निवेश या अन्य किसी कृत्रिम कारणों से 15 वर्ष की सीमा में बांध कर सारे वाहनों को स्क्रैप कर देना यह राष्ट्रीय संपत्ति का बहुत बड़ा नुकसान होगा यह जो 10 - 15 पर्सेंट का लाभ दिखाया जा रहा है यह वास्तव में कोई मायने नहीं रखता अगर कोई वाहन 50 वर्ष चल सकता है और महंगे वाहन ,भारी वाहन जतन से चलाए भी जाते हैं तकनीक के परिवर्तन से उसमें मॉडिफाइड किया जा सकता है परंतु उसे बना कर फेंक देना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है यह राष्ट्रीय संपत्ति का सीधा नुकसान है जो भी पुराने वाहन हैं वह बेहद मजबूती के साथ बने हुए और श्रेष्ठ क्वालिटी के हैं अगर वह नहीं चलेंगे तो उनका मालिक खुद ही उन्हें स्क्रैप में बेच देगा जैसा अभी तक होता आया है15 वर्ष की सीमा में बांध कर आप अच्छे  भले,चलते-फिरते वाहन को स्क्रैप बनाने पर तुले हुए हैं यह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान है अर्थात राष्ट्र का नुकसान है और नए वाहन जो दिए जाएंगे वह पुराने वाहन की कीमत से कई गुना अधिक महंगे और बहुत ही घटिया क्वालिटी के ही है  (मजबूती की दृष्टि से) जो किसी भी छोटे-मोटे एक्सीडेंट में पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं विदेशी निवेश को प्राप्त करने के लिए और कुछ रोजगार के लिए आप कई गुना अधिक राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान करना चाहते हैं और जो इनसे आज रोजगार में लगे हुए लाखो लोग हैं वह पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे क्योंकि 10 गुना 20 गुना महंगे नए और घटिया वाहन तो वे  खरीद नहीं पाएंगे और जो खरीदेंगे भी वह रोएंगे क्योंकि यह प्लास्टिक के खिलौने होंगे हम इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी इस खेल को देख चुके हैं कि ₹10.000 की लागत वाली चीज को लाख रुपए में बेचा जा रहा है किसको लाभ पहुंचाया जा रहा है और किसको लाभ हो रहा है यह कंचन को कचरा बनाने का अभियान है इसे समझा जाना चाहिए और तुरंत रोका जाना चाहिए हर समझदार व्यक्ति को राष्ट्रीय संपत्ति के किसी भी नुकसान का विरोध करना चाहिए 

विनम्र निवेदन है की समस्या की तह में जाकर समस्या को समझना चाहिए और जितने भी वाहन उद्योग में  निवेश से कारखाने  खोलें गए हैं उन सभी को बंद किया जाए और इस क्षेत्र में किसी भी नए निवेश को कदापि स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए  और किसी भी क्षेत्र में बाहरी निवेश को हमें हतोत्साहित कर स्वदेशी उधयोग  को ही आगे बढ़ाना चाहिए  और जो अनावश्यक कार्य ,गैर जरूरी कार्यों को बिलकुल ना करें कंचन को कचरा बनाने का प्रयास ना करें


मंगलवार, 10 अगस्त 2021

देश के साथ मजाक

 देश के साथ मजाक - एक उदाहरण के साथ बात प्रारम्भ करता हूँ TVS Motor Company ने जानकारी दी है कि TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर अब 11,250 रुपये सस्ती हो गई है। tvs ने एक बयान में कहा कि नई कीमत सरकार द्वारा फेम 2 योजना के तहत सब्सिडी में बदलाव को लेकर हाल में की गयी घोषणा के अनुरूप है। इससे देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।

टीवीएस मोटर कंपनी की इस घोषणा में अनेकों कमियां हैं पहली कंपनी टीवीएस की तरफ से है दूसरी कमी सरकार की तरफ से है तीसरी कमी राष्ट्रहित की और से है सबसे पहली बात यह बहुत अच्छी बात है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जाए जिससे प्रदूषण और तेल पर हमारी निर्भरता कम हो सके इसके लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया स्टेज 2 (फेम इंडिया 2, FAME II) योजना में आंशिक संशोधन किया था। जिसके बाद कंपनी ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत में कटौती की घोषणा की है।
सरकार के आवाहन पर टीवीएस कंपनी ने वाहन जिसकी कथित कीमत बहुत घटा दी गई हैकंपनी ने जानकारी दी है कि TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर अब 11,250 रुपये सस्ती हो गई है। अब इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की 1,00,777 रुपएये हो गई है। पहले इसकी कीमत 1,12,027 रुपये थी। वहीं कंपनी ने एक बयान में कहा कि नई कीमत सरकार द्वारा फेम 2 योजना के तहत सब्सिडी में बदलाव को लेकर हाल में की गयी घोषणा के अनुरूप है। इससे देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह देश के साथ एक मजाक है एक साधारण स्कूटर की कीमत ₹100000 लाख रुपए से अधिक हो और उसमें से एहसान करते हुए ₹11000 कम कर लिए जाएं वास्तव में देश के साथ एक क्रूर मजाक है एक इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर अगर बहुत साधारण तरीके से सोचा जाए एक मोटर एक बॉडी 1 बैटरी चार्जर यही इसकी मुख्य संपत्ति होती है अगर आधार प्राइस इन सब चीजों को जोड़ा जाए तो अधिकतम 10 से ₹15000 से अधिक इनका मूल्य नहीं होता है परंतु इन्हें कंपनी लाख-लाख रुपए में बेचकर देश को धोखा दे रही है वास्तव में देखा जाए तो आज देश में किसी भी वाहन को मैन्युफैक्चर करने की आवश्यकता समाप्त हो चुकी है इन वाहन मैन्युफैक्चरर यूनिटों को कंपनियों को पुरानी गाड़ियों के मॉडिफिकेशन का कार्य दिया जाना चाहिए और उसकी कीमत न्याय संगत होना चाहिए उसपर सरकार की नजर होना चाहिए
सरकार का कार्य है देश में गलत चीजों को ना होने दे जबकि यहां सरकार स्वयं इस तरह की दोषपूर्ण योजनाओं को आगे बढाना चाहती है ,स्वयं अमली जामा पहनाना चाहती है,यह देश पर, देश की जनता पर, देश की अर्थव्यवस्था पर ,अनावश्यक भारी बोझ डालना है जिस चीज की आवश्यकता नहीं है उन यूनिटों को प्रोत्साहित किया जा रहा है करने वाले अति आवश्यक और महत्वपूर्ण कार्यों की देश में कमी नहीं है फिर क्यों उनसे आँखे मूंदकर ,अनावश्यक दोषपूर्ण और देश की आर्थिक क्षति करने वाले कार्यों को अनावश्यक तौर तरीके से किया जा रहा है वर्तमान परिस्थितियां देश की आवश्यकता क्षमता देखते हुए देश में किसी भी नए वाहन की आवश्यकता नहीं है न हीं पुराने वाहनों को रद्द करने की कोई आवश्यकता है अगर करना ही है तो उनके स्थान पर पुराने वाहनों में कुछ परिवर्तन करे , किसी भी वाहन के 70% पार्ट पुर्जे वही आसानी से काम में आ सकते हैं केवल इंजिन के स्थान पर इलेक्ट्रिक या सोलर प्लेट ,डायनेमा ,बेटरी चार्जर, आदि चीजो की आवश्यकता होगी उन्हें बनाकर पुराने वाहन में जोड़ा जा सकता हैं यह किया जा सकता है कि वह गाड़ी दोनों चीजों से चल सके आपातकाल में पेट्रोल से भी चल सके तो क्या हर्ज है
आज हमारा देश जनसंख्या आधिक्य के साथ, वाह्नाधिक्य वाला देश बन चुका है हम जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं यह हमारी कमी है सड़कों पर चलने का स्थान नहीं है कहीं पर भी जाओ पार्किंग के लिए स्थान नहीं है नई नीति के तहत ,पुराने वाहनों को भंगार में फेंका जाएगा जिनसे अभी वर्षों तक देखरेख करते हुए कार्य चलाया जा सकता है तो क्यों नहीं उन्हें मॉडिफिकेशन करके उनका प्रयोग किया जाए उन्हें नष्ट करना राष्ट्रीय संपत्ति को नष्ट करने जैसा है और अभी यह जो नया सब किया जा रहा है जिसके तहत आमंत्रित कर नये नये कारखाने खोले जा रहे है विदेशी निवेश करने वालो को उनकी शर्तो पर सरकार द्वारा उन्हें देश को लुटने की छुट दी जा रही है उसमे सहयोग किया जा रहा है अब ये जो कारखाने चलेंगे जनता के खरीदने तक यह जो अतिरिक्त दबाव होगा कृत्रिम दबाव होगा और इसका असली बोझ देश पर और देश की जनता पर ही पड़ेगा जिस शक्ति सामर्थ्य और पूंजी से हम ठोस और वास्तविक कार्य कर सकते हैं उसे हम एक तरह से बर्बाद कर रहे हैं यह नहीं होना चाहिए सरकार के विकास की चिंतन की यह धारा बहुत ही गलत है इस पर बहुत गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए