कंचन को कचरा बनाने का प्रयास
आदरणीय आदरणीय प्रधानमंत्री जी आपने जो स्क्रैप पॉलिसी लांच की है उचित नहीं है उसे वापस लेना चाहिए कचरे से कंचन बनाने का अभियान नहीं है बल्कि कंचन से कचरा बनाने का अभियान है प्रधानमंत्री जी एक चीज होती है राष्ट्रीय संपत्ति राष्ट्र में जो कुछ भी है वह राष्ट्र की संपत्ति है और वह जब तक उपयोग में आ सकती है तब तक उसका उपयोग करना यह हमारा कर्तव्य भी है,आज की आवश्यकता भी है और राष्ट्र की सेवा भी है विदेशी निवेश या अन्य किसी कृत्रिम कारणों से 15 वर्ष की सीमा में बांध कर सारे वाहनों को स्क्रैप कर देना यह राष्ट्रीय संपत्ति का बहुत बड़ा नुकसान होगा यह जो 10 - 15 पर्सेंट का लाभ दिखाया जा रहा है यह वास्तव में कोई मायने नहीं रखता अगर कोई वाहन 50 वर्ष चल सकता है और महंगे वाहन ,भारी वाहन जतन से चलाए भी जाते हैं तकनीक के परिवर्तन से उसमें मॉडिफाइड किया जा सकता है परंतु उसे बना कर फेंक देना कोई बुद्धिमानी का काम नहीं है यह राष्ट्रीय संपत्ति का सीधा नुकसान है जो भी पुराने वाहन हैं वह बेहद मजबूती के साथ बने हुए और श्रेष्ठ क्वालिटी के हैं अगर वह नहीं चलेंगे तो उनका मालिक खुद ही उन्हें स्क्रैप में बेच देगा जैसा अभी तक होता आया है15 वर्ष की सीमा में बांध कर आप अच्छे भले,चलते-फिरते वाहन को स्क्रैप बनाने पर तुले हुए हैं यह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान है अर्थात राष्ट्र का नुकसान है और नए वाहन जो दिए जाएंगे वह पुराने वाहन की कीमत से कई गुना अधिक महंगे और बहुत ही घटिया क्वालिटी के ही है (मजबूती की दृष्टि से) जो किसी भी छोटे-मोटे एक्सीडेंट में पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं विदेशी निवेश को प्राप्त करने के लिए और कुछ रोजगार के लिए आप कई गुना अधिक राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान करना चाहते हैं और जो इनसे आज रोजगार में लगे हुए लाखो लोग हैं वह पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे क्योंकि 10 गुना 20 गुना महंगे नए और घटिया वाहन तो वे खरीद नहीं पाएंगे और जो खरीदेंगे भी वह रोएंगे क्योंकि यह प्लास्टिक के खिलौने होंगे हम इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी इस खेल को देख चुके हैं कि ₹10.000 की लागत वाली चीज को लाख रुपए में बेचा जा रहा है किसको लाभ पहुंचाया जा रहा है और किसको लाभ हो रहा है यह कंचन को कचरा बनाने का अभियान है इसे समझा जाना चाहिए और तुरंत रोका जाना चाहिए हर समझदार व्यक्ति को राष्ट्रीय संपत्ति के किसी भी नुकसान का विरोध करना चाहिए
विनम्र निवेदन है की समस्या की तह में जाकर समस्या को समझना चाहिए और जितने भी वाहन उद्योग में निवेश से कारखाने खोलें गए हैं उन सभी को बंद किया जाए और इस क्षेत्र में किसी भी नए निवेश को कदापि स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी क्षेत्र में बाहरी निवेश को हमें हतोत्साहित कर स्वदेशी उधयोग को ही आगे बढ़ाना चाहिए और जो अनावश्यक कार्य ,गैर जरूरी कार्यों को बिलकुल ना करें कंचन को कचरा बनाने का प्रयास ना करें
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