देश के साथ मजाक
TVS Motor Company (टीवीएस मोटर कंपनी) ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर TVS iQube (टीवीएस आईक्यूब) की कीमतों में बड़ी कटौती की है। टीवीएस मोटर कंपनी ने मंगलवार को कहा कि उसने फेम 2 योजना के तहत सब्सिडी में बदलाव के अनुरूप अपनी आईक्यूब इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमतें घटा दी हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया स्टेज 2 (फेम इंडिया 2, FAME II) योजना में आंशिक संशोधन किया था। जिसके बाद कंपनी ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत में कटौती की घोषणा की है।
कीमत कितनी हुई कम
कंपनी ने जानकारी दी है कि TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर अब 11,250 रुपये सस्ती हो गई है। अब इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की दिल्ली में कीमत 1,00,777 रुपएये हो गई है। पहले इसकी कीमत 1,12,027 रुपये थी। वहीं बंगलूरू में इसकी कीमत अब 1,10,506 रुपये हो गई है, जो पहले 1,21,756 रुपये थी। कंपनी ने एक बयान में कहा कि नई कीमत सरकार द्वारा फेम 2 योजना के तहत सब्सिडी में बदलाव को लेकर हाल में की गयी घोषणा के अनुरूप है। इससे देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टीवीएस मोटर कंपनी की इस घोषणा में अनेकों कमियां हैं पहली कंपनी टीवीएस की तरफ से है दूसरी कमी सरकार की तरफ से है तीसरी कमी राष्ट्रहित की और से है सबसे पहली बात यह बहुत अच्छी बात है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग किया जाए जिससे प्रदूषण और तेल पर हमारी निर्भरता कम होते हो सके इसके लिए हाल ही में केंद्र सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया स्टेज 2 (फेम इंडिया 2, FAME II) योजना में आंशिक संशोधन किया था। जिसके बाद कंपनी ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत में कटौती की घोषणा की है।
सरकार के आवाहन पर टीवीएस कंपनी ने वाहन जिसकी कथित कीमत बहुत घटा दी गई हैकंपनी ने जानकारी दी है कि TVS iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर अब 11,250 रुपये सस्ती हो गई है। अब इस इलेक्ट्रिक स्कूटर की दिल्ली में कीमत 1,00,777 रुपएये हो गई है। पहले इसकी कीमत 1,12,027 रुपये थी। वहीं कंपनी ने एक बयान में कहा कि नई कीमत सरकार द्वारा फेम 2 योजना के तहत सब्सिडी में बदलाव को लेकर हाल में की गयी घोषणा के अनुरूप है। इससे देश में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह देश के साथ एक मजाक है एक साधारण स्कूटर की कीमत ₹100000 लाख रुपए से अधिक हो और उसमें से एहसान करते हुए ₹11000 कम कर लिए जाएं वास्तव में देश के साथ एक क्रूर मजाक है एक इलेक्ट्रॉनिक स्कूटर अगर बहुत साधारण तरीके से सोचा जाए एक मोटर एक बॉडी 1 बैटरी चार्जर यही इसकी मुख्य संपत्ति होती है अगर आधार प्राइस इन सब चीजों को जोड़ा जाए तो अधिकतम 10 से ₹15000 से अधिक इनका मूल्य नहीं होता है परंतु इन्हें कंपनी लाख-लाख रुपए में बेचकर देश को धोखा दे रही है वास्तव में देखा जाए तो आज देश में किसी भी वाहन को मैन्युफैक्चर करने की आवश्यकता समाप्त हो चुकी है इन वाहन मैन्युफैक्चरर यूनिटों को कंपनियों को पुरानी गाड़ियों के मॉडिफिकेशन का कार्य दिया जाना चाहिए और उसकी कीमत न्याय संगत होना चाहिए उसपर सरकार की नजर होना चाहिए
सरकार की ओर से कमी- सरकार का कार्य है देश में गलत चीजों को ना होने दे जबकि यहां सरकार स्वयं इस तरह की दोषपूर्ण योजनाओं को अमली जामा पहनाना चाहती है,यह देश पर, देश की जनता पर, देश की अर्थव्यवस्था पर ,अनावश्यक भारी बोझ डालना है जिस चीज की आवश्यकता नहीं है उन यूनिटों को प्रोत्साहित किया जा रहा है करने वाले अति कार्यों की देश में कमी नहीं है फिर क्यों अनावश्यक कार्यों को अनावश्यक तौर तरीके से किया जा रहा है वर्तमान परिस्थितियां देश की आवश्यकता देश क्षमता देखते हुए देश में किसी भी नए वाहन की आवश्यकता नहीं है नहीं पुराने वाहनों को रद्द करने के स्थान पर उन वाहनों में कुछ परिवर्तन किए जा सकते हैं किसी भी वाहन के 70% पार्ट पुर्जे वही काम आ सकते हैं केवल इंजिन के स्थान पर इलेक्ट्रिक या सोलर प्लेट ,डायनेमा ,बेटरी चार्जर, आदि चीजें ऐड की जा सकती हैं तो कोई बड़ी बात नहीं है उसमें यह भी किया जा सकता है कि वह गाड़ी दोनों चीजों से चल सके आपातकाल में पेट्रोल से भी चल सके तो क्या हर्ज है
राष्ट्रहित की ओर से इस में कमी है अभी हमारा देश वाह्नाधिक्य वाला देश बन चुका है हम जनसंख्या पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं यह हमारी कमी है सड़कों पर चलने का स्थान नहीं है कहीं पर भी जाओ पार्किंग के लिए स्थान नहीं है ,पुराने वाहनों को भंगार में फेंका जाएगा उससे अभी वर्षों तक देखरेख करते हुए कार्य चलाया जा सकता है तो क्यों नहीं उन्हें मॉडिफिकेशन करके उनका प्रयोग किया जाए उन्हेंनष्ट करना राष्ट्रीय संपत्ति को नष्ट करने जैसा है और यह जो नया सब किया जाएगा मैन्युफैक्चरिंग चलेंगे जनता के खरीदने तक यह जो अतिरिक्त दबाव होगा कृत्रिम दबाव होगा और इसका असली बोझ देश पर और देश की जनता पर पड़ेगा जिस शक्ति सामर्थ्य और पूंजी से हम ठोस और वास्तविक कार्य कर सकते हैं उसे हम एक तरह से बर्बाद कर रहे हैं यह नहीं होना चाहिए सरकार के विकास की चिंतन की यह धारा यह गलत है इस पर बहुत गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए
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